जिंदगी ऐसी हो गई है कि हम अपने ही पास नही है।हम जब तक खुदको नही जान लेते तब तक सब कुछ अधूरा है।दुनिया मे कई तरके लोग आपको मिलेंगे वो लोग आपको अपने अनुभव या फिर अपने मतलब के हिसाब से आपको सलाह देंगे लेकिन आपको किसीकी सुन ने की जरूरत नही बस आपको अपने मनकी सुन्ना है।
अगर आप किसीको पूछेंगे की ये चीज़ केसी लग रही है तो वो व्यक्ति अपनी परिस्थितियों के अनुसार जवाब देता है जैसेकि उसने नीले रंगका चश्मा पहना है तो उसको वो चीज़ नीले रंगकिहि नज़र आएगी।
प्रकृति भी हमे यही शिखाती है कि किसीसे कोई उम्मीद मत रखो खुद अपने रास्ते के पथदर्शक बनो।हमारे पास सदैव दो रास्ते होते है एक कि कुछ किसीको देकर चलो जिससे वे आपको याद कर सके,दूसरा वो रास्ता ही छोड़ दो जिसपे आप चल नही सकते।
जिंदिगी में कुछ साथ ले जानेकी जरूरत नही है।अरे कोई हमे क्या देगा हम इतने नसीब वाले है कि हम किसीको कुछ दे सके जिसकी उसको जरूरत है।बस वही दुआ हमारे साथ चलतीहै बाकी यहां के लोग या ये चीज़े हमारे साथ कुछ नही आता।

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