मातृभाषा संवर्धन कार्यक्रम।बहोत ही महत्व पूर्ण कार्य। GCERT द्वारा उसे संवारा ओर सजाया गया।गुजरात से पचास अध्यापको को पसंद किया गया।सभी अध्यापको को DIET ने अपने डिस्ट्रिक्ट से पसंद करके GCERT में भेजे थे।इस कार्यमें मुजे भी जुड़ने का मौका मिला।गांधीनगर में पिछले दिनों, दो दिवसिय कार्यशालामें मुजे जानेका अवसर प्राप्त हुआ। दो दिन की कार्यशाला थी।वहां मार्गदर्शकों से हमने शिखाकी कहानियां कैसे कहि जाती है।शिक्षा में कहानियों का क्या महत्व है।भिन्न भिन्न विषय के साथ कहानियों को कैसे जुड़ा जाए जिससे शिक्षाके कठिन बिंदुओं को सरल बनाया जाए।दो दिन की इस कार्यशाला के दौरान BISAG स्टूडियो में कहानी रिकॉर्ड करने का अवसर प्राप्त हुआ।वहां पहेली बार केमेरे के सामने,केमेरे को फेस कर के काम करनेका अनुभव प्राप्त हुआ।वो अनुभव मेरे लिए बहुतही खास रहा।अध्यापको के द्वारा BISAGमें जो कहानी कही गई,रिकॉर्ड हुई उसमें मेरे द्वारा 'दो बिल्ली एक बंदर’ वाली कहानी कही गई।इस कहानियों को वंदे गुजरात चेनल पर गुजरातके सभी लोग देख शकते है।।एक शिक्षक को इतने व्यूवर सिर्फ GCERT के द्वारा ही मिल सकती हैं।
में GCERT के निर्देशक डॉ. टी.एस. जोशी सर का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी।ऐसे नवाचार में मुजे जिन्होंने जुड़ने का मौका दिया।में उन्हें प्रणाम अर्पित करती हूं।साथ हमारे मार्गदर्शक डॉ.कोमलबेन व्यास,सोनलबेन चौहान,श्रीमती अमीबेन जोशी,श्रीमती रश्मिकाबेन मोदी के साथ श्री याह्या सपाटवाला सर, और वर्कशॉप में बुलाये गये सभी एक्सपोर्ट का में दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।साथ मे BISAG की टेक्निकल टीम के सभी सहयोगियो का शुक्रिया।
आप कहानी को इस लिंक https://youtu.be/aQ1zwlNgPZAपर देख सकते हैं।


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