अगर भूल खुद से हुई होतो लोग भूल जाते हे,और अगर भूल दुसरेसे हो तो वो गलती बन जाती है।
एक टीचर को अगर कोई महावरा नही आतातो वह अपने आप किसीको बताये बिना गूगल से या किसीभी बूकमे से खोज के शिख लेता है।और अगर बच्चेको कोई महावरा नही आता तो उसको सजा मिलती है ये कहा का न्याय हे।
अगर बच्चेको परीक्षामे कम मार्क्स मिलतेहै तो माँ-बाबा उशको डाटते हे और वही माँ बाबा बच्चेकी उम्रके थे तब उनकी स्थिति क्या थी वो याद नही करते।अरे बच्चे अच्छे मार्क्स लानेके लिए स्कूलमे नही जाते वोतो अच्छि बाते जानने और जीवनमे नया कुछ शिखने के लिए स्कूल जाते हे।
अगर बच्चेसे कोई गलती हुई होतो उसे समजाना चाहिए और वो गलती दुबारा न हो इसके लिए उसे बताना और प्यार से समजाना चाहिए लेकिन गलतिकी बच्चेको सजा नही देनी चाहिए।बच्चेको प्यारसे ऐसी शिख देनी चाहिए की बच्चे अपनी गलतिको सुधारें और दुबारा ऐसी भूल ना करे।
आज 5th सप्टेम्बर हे उसे पुरे देशमे शिक्षक दिनके रूप में मनाया जाता है।बच्चेके जीवनमे उसके शिक्षक का स्थान ,माता पिता के तुरंत बाद आता है।बच्चेको हररोज कुछ नया शिखने की अपेक्षा शिक्षक के पास होती हे।हमे वो अपेक्षा पूरी करनेकी पूरी कोशिश करनी चाहिए।हमे ऐसा माहोल बनाना है कि बच्चे हररोज नया शिखे।
परीक्षामे अगर मार्क्स ज्यादा आगये तो वो बच्चा होशियार और अगर मार्क्स कम आये तो बच्चे को कुछ नही आता ये कहना व्याजबी नही है।व्यक्ति को सभी क्षेत्रका नोलेज नही होता। तो ये तो छोटेसे बच्चे हे,अभी तो उनको जिंदगीमें बहोत कुछ शिखना हे।बच्चेको उनकी किसीभी गलती की सज़ा नही प्यार से समजादो जिससे वो आगे बढ़ने से रुके नही और वो कुछ नया सोचके अपनी जिंदगीमें आगे बढ़ सके।
चलो नया आविष्कार करे.....
साथ चलके नए रास्ते बनाए.....
साथ चलके नए रास्ते बनाए.....
#छोटी बातें
#chhoti baate

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