Saturday, 23 September 2017

एक शिक्षक की बिदाई

शिक्षक कभी साधारण नही होता,प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे पलते है।
चाणक्य के मुताबित शिक्षक ही ऐसी व्यक्ति है जो आने वाले दिनों में बदलाव ला सकती है।शिक्षक आने वाली युवा पीढ़ी में अगर अच्छे संस्कार और शिक्षण के बीज बोए तो नई सोच और नए विचारों का निर्माण होता है।अगर शिक्षक अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से नही निभाता तो उसके प्रभाव से आने वाले कल में प्रलय भी आ शकता है।
मूर्तिकार केवल मूर्ति बनाते है लेकिन शिक्षक तो डॉक्टर, इंजिनियर, आर्टिस्ट,शिक्षक,वकील आदि लोगो का निर्माण करता है।शिक्षक एक सर्जक है।
ऐसे ही एक शिक्षिका बहन श्री मीना रावल को उनकी स्कूल के बिदाई समारम्भ में मिलनेका का मौका मिला।मीना बहन पिछले 10 सालों से नानी आखोल प्रा.शाला में पढ़ाते है।वय निवृति के कारण आज उनके सन्मान के लिए एक कार्यक्रम रखा गया था।
इस कार्यक्रम की बहोत सारी अच्छी बातें है लेकिन में एक बात आपसे शेर करना चाहती हु।
मीना बहन की बिदाई कार्यक्रम में सब लोग उनके लिए छोटी मोटी भेट लेके आए थे।कितने सारे बच्चे भी उनके लिए भेट लेके आए थे।लेकिन हर्ष की बात ये थी की पोस्टर में दिखाई देने वाली लड़कियां अपनी शिक्षिका बहन के लिए खुद अपने हाथों से बनाए हुए मिट्टी की श्री कृष्ण की मूर्ती भेट दी।ये एक शिक्षिका के लिए बहोतही गर्व की बाबत है।ये भेट उनको सबसे ज्यादा पसंद आई और वो इसे देखती रह गई।बच्चो के मन मे मीना बहन के लिए बहोत ही प्यार दिखाई दिया।
दुनिया मे सबसे निर्दोष प्रेम शिक्षक(गुरु) और वोद्यार्थीओ (शिष्य)के बीच का है।हम भाग्यशाली है कि यही प्यार हमने दिया है और हमने पाया भी है।


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