आज कल एक नया डोर चलता हैं! कोई भी कैसा भी सवाल खड़ा करता हैं! मुझे ऐ जान के दुःख होता हैं की हम सवाल भी किसी गाइड या साथी की प्रायवेट पब्लिकेशन के प्रकाशन से पूछते हैं! ऐसे में सवाल ये हैं की तार्किक चिंतन और वैचारिक चिंतन बच्चे क्यों नहीं कर रहे हैं!
इसका एक मात्र विकल्प हैं बछो से ब्रेन स्ट्रोमिग की गतिविधि करते रहना!और इस में हम कुछ छोटा बड़ा कर रहे हैं! कुछ महीनो पहले मेने छोटा सा काम किया!बच्चो से पजल्स और अन्य सवाल जवाब करना शुरू किया! जव बच्चे मुझे सवाल के जवाब देते थे!में खुश होती थी!मेने सोचा की क्यों न अब में कुछ शास्त्रीय स्वरूप में सवाल या पजल्स रखु तो क्या बच्चे उसे भी बना पायेंगे!मेने डरते हुए ऐसा किया!आज में खुश हु की मेरे इस विचारको मेने अमली किया!इस विचार से मुझे परिणाम मिला!
आज नियमित रूप में मेरे बच्चे पजल्स खोजते हिन्!बनाते हैं और उसे सोल्व भी करते हैं!मुझे कुशी हैं की आज मेरे पास 1000 से अधिक पजल्स हैं!ये साडी पजल्स का निर्माण भी मेरे बच्चो ने किये हैं!आप भी इस प्रक्रिया को आपके अध्यापन केंद्र में प्रायोगिक रूप से अमली करे!
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