Monday, 26 February 2018

चंद्रशेखर आज़ाद

“दुश्मनकी गोलियोका हम सामना करेंगे 
आजाद ही रहे है, आजाद ही रहेंगे”
ये चंद्रशेखर आज़ादने लिखी हुई कविता है जो वो हमेशा गुनगुनाते रहते थे।
आज चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि।

चंद्रशेखर सिर्फ 14 से 15 साल की उम्र में 1921 में गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़ गए थे और तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जब जज ने उनसे उनके पिता नाम पूछा तो जवाब में चंद्रशेखर ने अपना नाम आजाद और पिता का नाम स्वतंत्रता और पता जेल बताया. यहीं से चंद्रशेखर सीताराम तिवारी का नाम चंद्रशेखर आजाद पड़ा. 
अलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस ने उन्हें घेर लिया और गोलियां दागनी शुरू कर दी दोनों ओर से गोलीबारी हुई चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन में ये कसम खा रखी थी कि वो कभी भी जिंदा पुलिस के हाथ नहीं आएंगे इसलिए उन्होंने खुद को गोली मार ली।चंद्रशेखर आजाद कीमृत्‍यु 27फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में  हुई थी।आजाद की मृत्‍यु के बाद इस पार्क का नाम बदलकर चंद्रशेखर आज़ाद पार्क रखा गया था।

                  हिम्मतसे काम ले मुसाफिर,
                  खुद पे भरोसा कर मुसाफिर।

#छोटी बातें
#chhoti baate
#છોટી બાતેં




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