Thursday, 23 November 2017

सत्संग सरिता

Chhoti baate छोटी बाते पजल puzzle chhoti baate
आज परम् पूज्य श्री सतपालजी महाराज जी अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए 28 वर्ष के बाद मानवधर्म आश्रम, महेसाणा,गुजरात में पधारे थे। गुरुजीके दर्शन और सत्संग के श्रवन के लिए भक्तों की भीड़ लगी थी।गुरुजी के पावन चरणों का दर्शन  का अवसर मुजे भी प्राप्त हुआ।संत और सत्संग को हम एक छोटी सी कहानीके माध्यम से जानेंगे।.
      एक सेठ और सेठानी रोज सत्संग में जाते थे।
सेठजी के एक घर एक पिंजरे में तोता पाला हुआ था। तोता एक दिन पूछता हैं कि सेठजी आप रोज कहाँ जाते है। सेठजी बोले कि सत्संग में ज्ञान सुनने जाते है। तोता कहता है, सेठजी संत महात्मा से एक बात पूछना कि में आजाद कब होऊंगा।

सेठजी सत्संग खत्म होने के बाद संत से पूछते है कि महाराज हमारे घर जो तोता है उसने पूछा हैं की वो आजाद कब होगा?
संत जी ऐसा सुनते हीं बेहोश होकर गिर जाते है। सेठजी संत की हालत देख कर चुप-चाप वहाँ से निकल जाते है।

घर आते ही तोता सेठजी से पूछता है कि सेठजी संत ने क्या कहा। सेठजी कहते है कि तेरे किस्मत ही खराब है जो तेरी आजादी का पूछते ही वो बेहोश हो गए। तोता कहता है कोई बात नही सेठजी में सब समझ गया।

दूसरे दिन सेठजी सत्संग में जाने लगते है तब तोता पिंजरे में जानबूझ कर बेहोश होकर गिर जाता हैं। सेठजी उसे मरा हुआ मानकर जैसे हीं उसे पिंजरे से बाहर निकालते है, तो वो उड़ जाता है।

सत्संग जाते ही संत सेठजी को पूछते है कि कल आप उस तोते के बारे में पूछ रहे थे ना अब वो कहाँ हैं। सेठजी कहते हैं, हाँ महाराज आज सुबह-सुबह वो जानबुझ कर बेहोश हो गया , मैंने देखा की वो मर गया है इसलिये मैंने उसे जैसे ही बाहर निकाला तो वो उड़ गया।

तब संत ने सेठजी से कहा की देखो तुम इतने समय से सत्संग सुनकर भी आज तक सांसारिक मोह-माया के पिंजरे में फंसे हुए हो और उस तोते को देखो बिना सत्संग में आये मेरा एक इशारा समझ कर आजाद हो गया।

      संतो की बातों को, उनके प्रवचन को हमे मात्र  सुनना ही नही बल्कि उसको जीवन मे उतारना है तब ही हमारा जीवन सफल होगा।
#जय गुरुदेव

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