मिले सुर मेरा तुम्हारा ,तो सुर बने हमारा.....ऐसीही भावना हमे युवा उत्सव में दिखाई पड़ती है।दुनिया मे अनेक प्रकार के उत्सव होते है इसमें एक युवा उत्सव भी है।
मुजे बनासकांठा और मेहसाना के युवा उत्सव में निर्णायक के तौर पे जाने का अवसर प्राप्त हुआ।युवा उत्सव यानी युवा के अंदर छुपी हुई कला को बाहर लाने का शुभ अवसर।युवान अपनी पढ़ाई के अलावा उनके अंदर छुपी हुई शक्तियों को बाहर लाके दुनियाके सामने प्रस्तुत करे इसलिए युवा उत्सव आयोजित किया जाता है।
युवा उत्सव आपसी सामंजस्य और सहयोग की भावना में वृद्धि करता है।युवा उत्सव का उद्देश्य कला एवं संस्कृति को बढावा देना है इससे विद्यार्थी में अध्ययन के अतिरिक्त सास्कृतिक एवं विविध कलाओं और साहित्य की क्षमताओं का विकास होता है।
इस युवा उत्सव में कई सारी प्रतियोगिताए होती है जिसमे लोकनृत्य सामूहिक गीत, भजन,ड्रामा,एक पात्रीय अभिनय लोकगीत,शास्त्रीय संगीत इत्यादीका समावेश होता है।युवान इसमें इतना अच्छा परफॉर्म करते है की हम देखतेही रह जाये।युवा को इस उत्सव में आके ये जानकारी मिलती है की दूसरे प्रतियोगि केसे परफॉर्म करते है,वो दूसरे कोनसे क्षेत्र में आगे जा सकता है और समूह भावना जागृत होती है।
मेरा ये मानना है की युवान के सर्वांगी विकास के लिए पढ़ाई के साथ साथ उनको खेलकूद ,संगीत ,डांस जैसे इत्यादि क्षेत्र में जुड़ना जरूरी है।
#युवा उत्सव


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