Wednesday, 26 April 2017

एक गाड़ी जीवन की...


दो मित्र थे।वो सभी काम एक साथ करते।कोई भी नया काम करनेसे पहले एकदूसरे से चर्चा करते फिर नया काम हाथमे लेते।एक दिन दोनों टहल ने के लिए जा रहे थे तब उन्होंने बहुतसे विहीकल्स रास्तेमें देखे।  ये देखकर दो मित्रो को भी गाडी केसे चलाते हे वो सिखने का मन हुआ।

वो दोनो एक ड्राइविंग स्कूलमें जॉइंट हुए।सबसे पहले ड्राइविंग सर  ने सिखाया का गाड़ी स्टार्ट करनेसे पहले क्लच दबाइए फिर गाड़ी का सेल स्टार्ट करे।फिर गाड़ी का गेर बदलिए।ऐसी कई सारी इंस्ट्रक्शन ड्राइविंग सर ने उन दो मित्रोंको दी थी।इस इंस्ट्रक्शन में एक इंस्ट्रक्शन ऐसीथी कि आप 

आगेका रास्ता देखो।अगर आपको कोई रास्तेमें अड़चन दिखाई दे तो पहलेसे थोड़ी थोड़ी ब्रेक लगाना सुरु करदो।वरना अचानक ब्रेक लगनेसे सामनेवाला सायद बचेके न बचे पर हमारा तो नुकसान होगा।या फिर गाड़ी में बैठे हुए लोगोको जाटका महसूस होगा।या फिर गाड़ी के टायर को भी थोड़ा तो नुकसान होगाही।
   
इससे बेहतर है आप आने वाले भविष्यको देखो और पहलेसे उसपे काम करो।मुसीबत आये उसकी राह मत देखो।धीरज से काम लेने वालेकि हमेशा जित होगी।
   
इन दो दोस्तोने अपने गुरुकी ये बातको जीवन में उतार लिया।उसने ये बातको जीवन जीने में भी काम लेली।परन्तु दूसरा दोस्त अपनी मस्ती में रहता और किसीकी नही सुनता।वो बस सभीकी बाते सुनता और अमल नही करता।वो दोस्त आजभी अपनी जिंदगीमें हररोज नई मुसिबटोसे गिरता जा रहा है।वो मुसीबत का सामना करने में धीरजभी नही रखता और अचानक से ब्रेक लगाता है जिससे उसकोहि नुकसान होताहै।

एकने  सुना तो वो अच्छी तरहा जी रहा है।दूसरे दोस्त ने वो कहावत को साबित कर दियाकि सेठ की सिखामन दरवाजे दरवाजे तक!
17.4.17



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