
शैक्षणिक व्यवस्था!
शैक्षणिक व्यवसाय और विचार धरा!
वैसे तो ऐ तिन शब्द अलग अलग हैं मगर ऐ तिन शब्द हमे न्य सिखाने को मजबूर करते हैं!किसी साथी के कहने पर मेने राईट टू एज्युकेशन के बारेमे पढ़ा!यहाँ मुझे एक बात जानने को मिली की बच्चो को ज्ञान के सर्जन के लिए कहा गया हैं!
सर्जन करने के बारे में समज सकती थी!ज्ञान का सर्जन क्या हैं! ऐ जानकारी और इसके बारे में समज प्राप्त करने हेतु कई मुद्दों के बारेमे जानकारी प्राप्त की!यहाँ मुझे हेस्स हुआ की जब हम कुछ ऐसा करवाते हैं की जिससे बच्चे अपने आप कुछ न्य करे!न्य समजे और इस समज को सांजा करे!वो ही ज्ञान का सर्जन हैं!इस के लिए मेने मेरी स्कुल के बच्चो के साथ कुछ करने का तय किया!कुछ नया करनेका सोचा!मेरे लिए कई सवाल थे!क्या एक बात समाज ने के बाद बच्चे अपने आप कुछ नया करेगे!एक बात ऐसी भी चलती रहती हैं की जो सिखा ते हैं उसके जेसा भी बच्चे नहीं करते!तो वो सीखी हुई चीज के बार में,उसके आधार पर नया कैसे करेंगे!
में भी समजना चाहती थी!में भी समज और ज्ञान के सर्जन के बारे में सीखना चाहती हु!मेने कक्षा 6 से 8 तक के बच्चो के साथ कुछ न्य करना शुरू किया!छोटे पजल्स और पजल्स का निर्माण हमारी पहचान हैं!उसमे हम धीरे धीरे आगे बढ़ना चाहते हैं!क्या और केसे किया!बच्चो के साथ हमने पजल्स के निर्माण के हेतु कहा से शुरू किया?ऐ और ऐसी रोचक जानकारी यहाँ क्रमश:लिख के आपको मिलते रहेंगे!
Good try
ReplyDeleteખૂબ સરસ આયોજન છે.
Deleteઅમી ગુડ ટ્રાય...
Deleteપણ આવા કોયડા આપણેય બનાવી ને આપવા ન જોઇએ?
Thanks Sir
ReplyDeleteThanks jiji
DeleteThanks amijiji
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